संबोधन विश्वभारती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोले मोदी - गुरुदेव का एकता संदेश न भूलें फैसले लेने की हिम्मत नहीं है , तो समझ लीजिए आप युवा नहीं रहेः प्रधानमंत्री
गुरुदेव का एकता संदेश न भूलें फैसले लेने की हिम्मत नहीं है , तो समझ लीजिए आप युवा नहीं रहेः प्रधानमंत्री
पड़ता है सत्ता में रहते हुए संयम रखना जरूरी , संवेदनशील बनना एजेंसी नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से , छात्रों गौरतलब बात कही है । उन्होंने कहा सफलता - असफलता हमारा भविष्य तय र नहीं करती । लेकिन अगर फैसला लेने से डर लगने तो हमारे लिए संकट है । अगर फैसला लेने की हिम्मत चली गई , तो समझ लीजिए नहीं रहे ।
प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के विश्वभारती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे । इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी । उन्होंने इस मौके पर कहा कि सत्ता में रहते हुए संयमित और संवेदनशील रहना पड़ता । इसी तरह आप युवा नहा हर विद्वान को , हर जानकार को भी उनके प्रति जिम्मेदार रहना पड़ता है , जिनके पास शक्ति है । प्रधानमंत्री ने कहा , ' मेरे लिए दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनना प्रेरक है । आज शिवाजी की जयंती भी है । गुरुदेव ने शिवाजी उत्सव नाम से कविता भी लिखी थी । ' इस मौके पर बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखलिया निशंक ' भी मौजूद रहे ।
सोचिए , हम समस्या बनेंगेया समाधान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो लोग इस वक्त दुनिया में आतंक फैला रहे हैं , उनमें भी शिक्षित लोग हैं वहीं , दूसरी ओर कुछ ऐसे भी हैं जो महामारी से दुनिया को मुक्ति दिलाने के लिए दिन - रात जान की बाजी लगा रहे हैं । ये सिर्फ विचारधारा का प्रश्न नहीं है । आप क्या करते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि आपका माइंड सेट निगेटिव है या पॉजिटिव । हमें सोचना होगा कि हम समस्या बनना चाहते हैं या फिर समाधान का हिस्सा । अगर आपकी नीयत साफ है , तो आपका हर आचरण कोई न कोई समाधान जरूर निकालेगा । '
छात्र 25 सालों के लिए विजन डॉक्यूमेंट बनाएं मोदी ने विश्वभारती के छात्रों से अपील की कि वे अगले 25 सालों के लिए विजन डॉक्यूमेंट बनाएं । इनमें लक्ष्यों को तय करें । साल 2047 में , जब भारत आजादी के 100 वर्ष का समारोह मनाएगा , तब विश्वभारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे , इस डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं । मोदी ने कहा , ' गुरुदेव कहते थे कि श्रमिक , समाजसेवी , संतों और समाज के सभी जागरूक साथियों को मिलकर समाज की मुक्ति के लिए प्रयास करने चाहिए । आपका ज्ञान सिर्फ आपका नहीं , बल्किादश का भीवी पीठ की राष्ट्र को गौरवान्वित कर सकता है
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