कोर्ट ने सरकार से पूछा- सरकार ने कानून बनाने से पहले किससे चर्चा की थी ?
पिछली कई सुनवाई से आप कह रहे हैं कि किसानों से बात हो रही है । लेकिन , नतीजा कुछ भी नहीं निकला ।
किसानों से कहा- हम ऐसा कतई नहीं कहेंगे कि किसान आंदोलन न करें । लेकिन , हम यह कह सकते हैं कि वे उस जगह ( सड़क ) पर न करें । हालांकि , हम उन्हें हटाने का आदेश नहीं देंगे
मदन सिंह कोरोटने मुख्य ब्यूरो / जी.ए. न्यूज़: 11-01 2021 जांलधर / सुप्रीम कोर्ट ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों को मनाने में नाकाम रही सरकार को सोमवार को फटकार लगाई । चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा- ' केंद्र सरकार स्पष्ट करे कि वह कानूनों के अमल पर रोक लगाएगी या नहीं ? अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो कोर्ट खुद ही रोक लगा देगा । कोर्ट ने कहा कि कानून के अमल पर रोक लगाकर एक कमेटी बनाई जाएगी , जो सभी पक्षों की बात सुनेगी । सरकार ने कहा कि अभी किसानों से बातचीत जारी है , इसलिए कानूनों पर रोक लगाना सही नहीं होगा । इस पर बोबडे ने कहा- ' हम निराश हैं । सरकार इस मसले में नाकाम रही है । मंगलवार को फैसला सुनाएंगे । ' दूसरी तरफ , किसानों ने कमेटी बनाने से इनकार कर दिया है । सरकार ने देर शाम हलफनामा दायर कर कहा कि धरने की वजह से कारोबार और लोगों को काफी नकसान हो रहा है ।
वेणुगोपालः पहले की सरकारें भी इन कानूनों पर काम कर रही थीं । ये किसानों के फायदे के हैं । चीफ जस्टिसः आपकी यह दलील यहां काम नहीं आने वाली कि पहले की सरकारों ने इसे शुरू किया था । हम आपसे कानून की संवैधानिकता के बारे में पूछ रहे हैं । इसके फायदे न गिनाएं । आपने कोर्ट को अजीब हालात में डाल दिया है । अगर आपमें समझ है तो कानूनों के अमल पर जोर मत दीजिए और फिर किसानों से बात कीजिए । हमने भी रिसर्च की है । हम एक कमेटी बनाना चाहते हैं । -तुषार मेहताः भारी संख्या में किसान संगठन इन कानूनों को फायदेमंद बता रहे हैं । चीफ जस्टिसः लेकिन , हमारे सामने तो अभी तक ऐसा कहने वाला कोई नहीं आया । आप कानूनों पर रोक लगाएंगे या नहीं ? अगर नहीं , तो हम लगा देंगे । आंदोलन कर रहे किसानों की मौतें हो रही हैं । वे आत्महत्या कर रहे हैं । वहां महिलाएं , बच्चे और बुजुर्ग भी बैठे हैं । असल समस्या कानून को लेकर है । इसलिए हम कमेटी बनाने जा रहे हैं । मेहता ने कुछ बोलना चाहा , पर उन्हें रोकते हुए चीफ जस्टिस ने कहा- ' हम समझ नहीं पा रहे हैं कि आप समस्या का हिस्सा हैं या समाधान का ? किसानों से गंभीरता से बात करनी चाहिए । एपी सिंह ( वकील ) : लोगों का भरोसा कानून से उठ रहा है । भरोसा कायम करना जरूरी है ।
चीफ जस्टिसः आपको हम पर भरोसा हो या नहीं ? हम सुप्रीम कोर्ट हैं । हम अपना काम करेंगे । हरीश साल्वे ( किसानों को सड़क से हटाने के पक्ष में ) : अगर कोर्ट रोक लगाना चाहता है तो सिर्फ कानून के विवादित हिस्सों पर रोक लगाए । चीफ जस्टिसः पूरे कानूनों पर रोक लगाएंगे । फिर भी किसान आंदोलन जारी रख सकते हैं । चीफ जस्टिसः वहां हिंसा भड़क सकती है । - एमएल शर्मा ( वकील , किसानों के पक्ष में ) : किसानों ने अभी तक कहीं कोई हिंसा नहीं की है । सिर्फ पुलिस ही किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसा रही है । वॉटर कैनन चला रही है ।
. . चीफ जस्टिसः शांति भंग होने से कुछ हुआ तो हम सब जिम्मेदार होंगे । हम नहीं चाहते कि खून - खराबे का कलंक हम पर लगे । • साल्वेः किसानों की ओर से कम से कम यह आश्वासन जरूर मिलना चाहिए कि कानून पर रोक लगने के बाद आंदोलन स्थगित होगा । चीफ जस्टिसः हम भी यही चाहते हैं । लेकिन , यह आदेश से नहीं हो सकता । हम ऐसा कतई नहीं कहेंगे कि किसान आंदोलन न करे । मगर , हम यह • कह सकते हैं कि उस जगह ( सड़क ) पर न करें । वेणुगोपालः सिर्फ 2-3 राज्यों के लोग विरोध कर रहे हैं । अन्य राज्यों में कोई विरोध नहीं है । आंदोलन के नाम पर कुछ गलत घटनाएं भी हुई हैं । चीफ जस्टिसः हम आपको कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई से नहीं रोक रहे । - दुष्यंत दवे ( वकील , किसानों के पक्ष में ) : किसान शांति भंग नहीं कर रहे , न ही ऐसा करेंगे । चीफ जस्टिसः हम इस आश्वासन से खुश हैं । - वेणुगोपालः यह बात लिखवा कर ली जाए । चीफ जस्टिसः आंदोलन वैसे ही चलना चाहिए , जैसे गांधी जी सत्याग्रह किया करते थे । - दुष्यंतः किसान अनुशासित हैं । यह उनकी आजीविका का सवाल है । इसलिए सड़क पर हैं । वे गणतंत्र दिवस परेड बाधित नहीं करना चाहेंगे । किसानों के बच्चे भी सेना में हैं ।
किसानों को रामलीला मैदान जाने दिया जाए । वेणुगोपालः कोर्ट अगर कानून के अमल पर रोक लगाने जा रहा है तो यह साफ करना चाहिए कि किन - किन प्रावधानों पर रोक लगेगी ? चीफ जस्टिसः हम सरकार की बार - बार आलोचना नहीं करना चाहते । लेकिन , यह सच है कि आप स्थिति को संभालने में नाकाम रहे हैं । पीएस नरसिम्हा ( वकील , किसानों को सड़क से हटाने के पक्ष में ) : कुछ लोग ही कानूनों का विरोध कर रहे हैं । - चीफ जस्टिसः हो सकता है कि केवल आपके मुवक्किल को कानून सही लगता हो । लेकिन , इससे समस्या का हल नहीं होगा । नरसिम्हाः कानूनों पर रोक लगाने से पहले सरकार को समय दिया जाना चाहिए । -चीफ जस्टिसः अगर इस दौरान हिंसा हुई तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? साल्वेः कानून पर रोक से शांति होती है तो ठीक है । लेकिन , कनाडा के संगठन सिख फॉर जस्टिस के बैनर भी आंदोलन वाली जगह पर दिख रहे हैं । इनको आंदोलन से बाहर कौन करेगा ? ये हिंसा की वजह बन सकतें हैं । आंदोलन को नियंत्रित रखना जरूरी है । किसानों को कहा जाना चाहिए कि बातचीत में कुर्सी पीछे कर अड़ियल रवैया न दिखाएं । सरकार से सकारात्मक बातचीत करें ।
आदेश नहीं दे सकते । साल्वेः कोर्ट को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आंदोलनकारियों की बात को सही नहीं ठहरा रहे । अगर ऐसा नहीं हुआ तो गलत संदेश जाएगा । चीफ जस्टिसः कानून की वैधता पर कोई भी फैसला सभी पक्षों को सुनने के बाद ही होगा । अभी हम कुछ अंतरिम आदेश देना चाहते हैं । हम कानून पर रोक लगाने जा रहे हैं । बाद में आंदोलनकारियों से पूछेगे कि वे सड़क से हटेंगे या नहीं ? - कोलिन गोंजाल्विस ( वकील ) : कोर्ट मुझे , प्रशांत भूषण , एचएस फूलका और दुष्यंत दवे को किसान संगठनों से बात करने को कहे । आज ही किसान संगठनों से बात कर कोर्ट के विचार उन्हें बताएंगे । • फूलकाः सरकार के गलत रवैये की वजह से ही ऐसा माहौल बना है । चीफ जस्टिसः गोंजाल्विस ठीक कर रहे हैं । अगर हम कानून का अमल रोकते हैं तो आपको किसानों को समझाकर वापस घर भेजना चाहिए । सबका दिल्ली में स्वागत है । लेकिन , लाखों लोग दिल्ली आएंगे तो स्थिति बिगड़ेगी । कोरोना का खतरा है । महिलाओं , बुजुर्गों और बच्चों को आंदोलन से अलग कर वापस भेजना चाहिए । मैं रिस्क ले रहा हूं । आप आंदोलनकारियों से बात कर उन्हें समझाइए कि चीफ जस्टिस ऐसा चाहते हैं ।
लगा देंगे -वेणुगोपालः अगर किसान कमेटी के समक्ष भी अड़ियल रवैया अपनाएंगे और कहेंगे कि कानून वापस लो , तो क्या होगा ? -चीफ जस्टिसः हमें किसानों की समझदारी पर भरोसा है । क्या हम सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड चीफ जस्टिस को कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करें ? जस्टिस आरएम लोढ़ा का नाम कैसा रहेगा ? दुष्यंतः सही रहेगा । चीफ जस्टिसः आप ही जस्टिस लोढ़ा से उनकी सहमति लेकर हमें बताएं । . मेहताः हम भी मंगलवार तक कमेटी के लिए अध्यक्ष के तौर पर सुझाव देंगे । चीफ जस्टिसः ठीक है । अभी हम फैसला सुरक्षित रख रहे हैं । लेकिन , जल्द ही पारित करेंगे । वेणुगोपालः जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए । -चीफ जस्टिसः हमें जल्दबाजी पर लेक्चर न दें । हम सरकार को बहुत समय दे चुके हैं । - मेहताः कोर्ट को यह भी आदेश जारी करना चाहिए कि कोई भी आंदोलनकारी गणतंत्र दिवस की परेड बाधित न करे । चीफ जस्टिसः इसके लिए अलग से अर्जी दायर करें । फिर विचार करेंगे । ( इसके बाद कोर्ट ने कानूनों पर रोक लगाने और कमेटी बनाने का फैसला सुरक्षित रख लिया । )
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